Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.15.3-4: ‘शुभ! तुम्हें यह कार्य गुप्त रूप से करना है। इसे कहीं प्रकट मत करना। सुमध्यमे! तुम एकान्त में नहुष के पास जाकर कहो- जगत्पते! तुम दिव्य ऋषिवन पर बैठकर मेरे पास आओ। यदि ऐसा हो जाए, तो मैं प्रसन्नतापूर्वक अपने आपको तुम्हारे अधीन कर दूँगा।’॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘शुभ! तुम्हें यह कार्य गुप्त रूप से करना है। इसे कहीं प्रकट मत करना। सुमध्यमे! तुम एकान्त में नहुष के पास जाकर कहो- जगत्पते! तुम दिव्य ऋषिवन पर बैठकर मेरे पास आओ। यदि ऐसा हो जाए, तो मैं प्रसन्नतापूर्वक अपने आपको तुम्हारे अधीन कर दूँगा।’॥3-4॥
‘Shubh! You have to do this work secretly. Do not reveal it anywhere. Sumadhyme! You go to Nahush in solitude and say – Jagatpate! You come to me sitting on the divine Rishivan. If this happens, I will happily submit myself under your control.’॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥