‘शुभ! तुम्हें यह कार्य गुप्त रूप से करना है। इसे कहीं प्रकट मत करना। सुमध्यमे! तुम एकान्त में नहुष के पास जाकर कहो- जगत्पते! तुम दिव्य ऋषिवन पर बैठकर मेरे पास आओ। यदि ऐसा हो जाए, तो मैं प्रसन्नतापूर्वक अपने आपको तुम्हारे अधीन कर दूँगा।’॥3-4॥
‘Shubh! You have to do this work secretly. Do not reveal it anywhere. Sumadhyme! You go to Nahush in solitude and say – Jagatpate! You come to me sitting on the divine Rishivan. If this happens, I will happily submit myself under your control.’॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥