श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  5.15.27-28 
तत: प्रज्वाल्य विधिवज्जुहाव परमं हवि:॥ २७॥
बृहस्पतिर्महातेजा देवराजोपलब्धये।
हुत्वाग्निं सोऽब्रवीद् राजञ्छक्रमन्विष्यतामिति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवराज की प्राप्ति के लिए महाबली बृहस्पति ने अग्नि प्रज्वलित करके उसमें उत्तम आहुति दी। राजन! अग्नि में आहुति देकर उन्होंने अग्निदेव से कहा - 'आप देवराज इन्द्र का पता लगाइए।' 27-28॥
 
Thereafter, for the attainment of the king of gods, the mighty Brihaspati lit the fire and offered the best oblation in it. Rajan! After offering sacrifice in the fire, he said to Agnidev – ‘You find out Lord Indra’. 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)