श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.15.25 
न भेतव्यं त्वया देवि नहुषाद् दुष्टचेतस:।
न ह्येष स्थास्यति चिरं गत एष नराधम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'देवी! उस दुष्टात्मा नहुष से मत डरो। यह दुष्ट यहाँ अधिक समय तक नहीं रह सकेगा। इसे चला गया समझो।॥ 25॥
 
‘Goddess! Do not be afraid of the evil soul Nahush. This wretch will not be able to stay here for long. Consider him gone.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)