श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.15.24 
शक्रं मृगय शीघ्रं त्वं भक्ताया: कुरु मे दयाम्।
बाढमित्येव भगवान‍् बृहस्पतिरुवाच ताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कृपा करके शीघ्र ही इन्द्र को खोजो। मैं आपका भक्त हूँ। मुझ पर दया करो।’ तब भगवान बृहस्पति ने ‘बहुत अच्छा’ कहकर उससे इस प्रकार कहा-॥24॥
 
Please find Indra quickly. I am your devotee. Have mercy on me.' Then Lord Brihaspati said 'very good' and told him thus -॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)