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श्लोक 5.15.23  |
नहुषेण विसृष्टा च बृहस्पतिमथाब्रवीत्।
समयोऽल्पावशेषो मे नहुषेणेह य: कृत:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| उधर नहुष से विदा लेकर इन्द्राणी बृहस्पति के यहाँ गयी और इस प्रकार बोली - 'हे देवगुरु! नहुष ने मेरे लिए जो समय निश्चित किया है, उसमें से अब थोड़ा ही समय शेष है॥ 23॥ |
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| On the other hand, after taking leave from Nahusha, Indrani went to Brihaspati's place and said thus - 'O Devguru! Only a little is left of the time fixed by Nahusha for me.॥ 23॥ |
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