श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.15.2 
विवर्धितश्च ऋषिभिर्हव्यकव्यैश्च भाविनि।
नीतिमत्र विधास्यामि देवि तां कर्तुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
'भामिनी! ऋषियों ने हवि और नैवेद्य देकर इसकी शक्ति बहुत बढ़ा दी है। अतः मैं यहाँ नीति के अनुसार ही कार्य करूँगा। देवि! तुम भी उसी नीति का पालन करो॥ 2॥
 
‘Bhamini! The sages have increased its power a lot by offering oblations and offerings. Therefore, I will act according to the policy here. Devi! You should follow the same policy.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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