श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  5.15.18-19 
मयि क्रुद्धे जगन्न स्यान्मयि सर्वं प्रतिष्ठितम्।
देवदानवगन्धर्वा: किन्नरोरगराक्षसा:॥ १८॥
न मे क्रुद्धस्य पर्याप्ता: सर्वे लोका: शुचिस्मिते।
चक्षुषा यं प्रपश्यामि तस्य तेजो हराम्यहम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं क्रोधित हो जाऊँ, तो यह जगत् नष्ट हो जाएगा। सब कुछ मुझ पर निर्भर है। शुचिस्मिते! यदि मैं क्रोधित हो जाऊँ, तो ये देवता, दानव, गंधर्व, किन्नर, नाग, राक्षस तथा समस्त जगत् मेरा सामना नहीं कर सकते। मैं जिस किसी को भी अपनी आँखों से देखता हूँ, उसका तेज हर लेता हूँ ॥18-19॥
 
If I become angry, this world will be destroyed. Everything depends on me. Shuchismite! If I become angry, then these gods, demons, Gandharvas, Kinnars, serpents, demons and the entire world cannot face me. Whomever I look at with my eyes, I take away his brilliance. ॥18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)