श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.15.14 
नासुरेषु न देवेषु तुल्यो भवितुमर्हसि।
सर्वेषां तेज आदत्से स्वेन वीर्येण दर्शनात्।
न ते प्रमुखत: स्थातुं कश्चिच्छक्नोति वीर्यवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आप अपने पराक्रम और दृष्टिमात्र से सबका तेज हर लेते हैं। देवताओं और दानवों में भी आपके समान कोई नहीं है। कोई कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, आपके सामने टिक नहीं सकता॥14॥
 
You take away the glory of everyone with your might and mere glance. There is no one equal to you, even among the gods and demons. No matter how powerful someone is, he cannot stand before you.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)