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mahabharat 5.15.11-12: सुरेश्वर! पूर्वकाल के इन्द्रों के वाहन हाथी, घोड़े और रथ आदि थे; किन्तु मेरी इच्छा है कि आपका वाहन सर्वथा अद्वितीय और असाधारण हो। वह वाहन ऐसा हो, जिसका उपयोग भगवान विष्णु, रुद्र, दैत्यों और दानवों ने भी न किया हो। ॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  5.15.11-12 
इन्द्रस्य वाजिनो वाहा हस्तिनोऽथ रथास्तथा॥ ११॥
इच्छाम्यहमथापूर्वं वाहनं ते सुराधिप।
यन्न विष्णोर्न रुद्रस्य नासुराणां न रक्षसाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सुरेश्वर! पूर्वकाल के इन्द्रों के वाहन हाथी, घोड़े और रथ आदि थे; किन्तु मेरी इच्छा है कि आपका वाहन सर्वथा अद्वितीय और असाधारण हो। वह वाहन ऐसा हो, जिसका उपयोग भगवान विष्णु, रुद्र, दैत्यों और दानवों ने भी न किया हो। ॥11-12॥
 
Sureshwar! The vehicles of the earlier Indras were elephants, horses and chariots etc. but it is my wish that your vehicle should be completely unique and extraordinary. That vehicle should be such that it has not been used even by Lord Vishnu, Rudra, demons and devils. ॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)