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mahabharat 5.15.10-11h: देवराज! मेरे हृदय में एक कार्य करने की इच्छा है, मैं उसे आपसे कह रहा हूँ, कृपया सुनें। राजन्! यदि आप मेरा यह कार्य पूर्ण कर देंगे, प्रेमपूर्वक कहे गए मेरे वचनों को स्वीकार कर लेंगे, तो मैं आपका अधीन हो जाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.15.10-11h 
कार्यं च हृदि मे यत् तद् देवराजावधारय।
वक्ष्यामि यदि मे राजन् प्रियमेतत् करिष्यसि॥ १०॥
वाक्यं प्रणयसंयुक्तं तत: स्यां वशगा तव।
 
 
अनुवाद
देवराज! मेरे हृदय में एक कार्य करने की इच्छा है, मैं उसे आपसे कह रहा हूँ, कृपया सुनें। राजन्! यदि आप मेरा यह कार्य पूर्ण कर देंगे, प्रेमपूर्वक कहे गए मेरे वचनों को स्वीकार कर लेंगे, तो मैं आपका अधीन हो जाऊँगा।
 
Devraj! I have a desire in my heart to do a task, I am telling you about it, please listen. King! If you complete this work of mine, if you accept my words spoken with love, then I will become your subordinate. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)