श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.15.1 
शल्य उवाच
एवमुक्त: स भगवाञ्छच्या तां पुनरब्रवीत्।
विक्रमस्य न कालोऽयं नहुषो बलवत्तर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
शल्य कहते हैं - युधिष्ठिर ! शची देवी की यह बात सुनकर इन्द्रदेव ने उनसे पुनः कहा - 'देवी ! यह समय वीरता दिखाने का नहीं है। इन दिनों नहुष बहुत शक्तिशाली हो गया है।॥ 1॥
 
Shalya says - Yudhishthira! On hearing Shachi Devi say this, Lord Indra again told her - 'Devi! This is not the time to show bravery. These days Nahush has become very powerful.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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