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श्लोक 5.15.1  |
शल्य उवाच
एवमुक्त: स भगवाञ्छच्या तां पुनरब्रवीत्।
विक्रमस्य न कालोऽयं नहुषो बलवत्तर:॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| शल्य कहते हैं - युधिष्ठिर ! शची देवी की यह बात सुनकर इन्द्रदेव ने उनसे पुनः कहा - 'देवी ! यह समय वीरता दिखाने का नहीं है। इन दिनों नहुष बहुत शक्तिशाली हो गया है।॥ 1॥ |
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| Shalya says - Yudhishthira! On hearing Shachi Devi say this, Lord Indra again told her - 'Devi! This is not the time to show bravery. These days Nahush has become very powerful.॥ 1॥ |
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