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mahabharat 5.149.7: वह बलवान, महान पराक्रमी और यादववंश का संस्थापक था। उसकी बुद्धि बड़ी मंद थी और उसने अभिमान के कारण समस्त क्षत्रियों का अपमान किया था॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.149.7 
यादवानां कुलकरो बलवान् वीर्यसम्मत:।
अवमेने स तु क्षत्रं दर्पपूर्ण: सुमन्दधी:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह बलवान, महान पराक्रमी और यादववंश का संस्थापक था। उसकी बुद्धि बड़ी मंद थी और उसने अभिमान के कारण समस्त क्षत्रियों का अपमान किया था॥ 7॥
 
‘He was strong, endowed with great valour and was the founder of the Yadava dynasty. His intellect was very dull and he insulted all the Kshatriyas out of pride.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)