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mahabharat 5.149.36: हे प्रभु! आप अपनी आसक्ति त्यागकर अपना कम से कम आधा राज्य, वाहन आदि वस्तुएँ पाण्डवों को दे दीजिए। तभी आपके तथा आपके छोटे भाइयों के प्राण बच सकेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.149.36 
प्रयच्छ राज्यार्धमपेतमोह:
सवाहनं त्वं सपरिच्छदं च।
ततोऽवशेषं तव जीवितस्य
सहानुजस्यैव भवेन्नरेन्द्र॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आप अपनी आसक्ति त्यागकर अपना कम से कम आधा राज्य, वाहन आदि वस्तुएँ पाण्डवों को दे दीजिए। तभी आपके तथा आपके छोटे भाइयों के प्राण बच सकेंगे।
 
O Lord! Give up your attachment and give away (at least) half of your kingdom along with vehicles and other things to the Pandavas. Only then can your life be saved along with your younger brothers.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि धृतराष्ट्रवाक्यकथने एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें धृतराष्ट्रवाक्य कथनविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)