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mahabharat 5.149.35: तुम राजा के पुत्र नहीं हो। तुम्हारा आचरण भी दुष्टों जैसा है। तुम लोभी हो और अपने सम्बन्धियों के प्रति सदैव पापमय विचार रखते हो। दुर्विनित! यह परम्परागत राज्य दूसरों का है। तुम इसे कैसे छीन सकते हो?॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.149.35 
अराजपुत्रस्त्वमनार्यवृत्तो
लुब्ध: सदा बन्धुषु पापबुद्धि:।
क्रमागतं राज्यमिदं परेषां
हर्तुं कथं शक्ष्यसि दुर्विनीत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तुम राजा के पुत्र नहीं हो। तुम्हारा आचरण भी दुष्टों जैसा है। तुम लोभी हो और अपने सम्बन्धियों के प्रति सदैव पापमय विचार रखते हो। दुर्विनित! यह परम्परागत राज्य दूसरों का है। तुम इसे कैसे छीन सकते हो?॥ 35॥
 
‘You are not the son of a king. Your behaviour is also like that of a wicked person. You are greedy and always have sinful thoughts towards your relatives. Durvinit! This traditional kingdom belongs to others. How can you usurp it?॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)