श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.149.34 
क्षमा तितिक्षा दम आर्जवं च
सत्यव्रतत्वं श्रुतमप्रमाद:।
भूतानुकम्पा ह्यनुशासनं च
युधिष्ठिरे राजगुणा: समस्ता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
क्षमा, सहनशीलता, इन्द्रिय-संयम, सरलता, सत्य, शास्त्रों का ज्ञान, प्रमाद का अभाव, समस्त प्राणियों पर दया और गुरुजनों के अनुशासन में रहना आदि सभी राजसी गुण युधिष्ठिर में विद्यमान हैं॥34॥
 
‘Forgiveness, tolerance, control of senses, simplicity, truthfulness, knowledge of scriptures, absence of carelessness, compassion for all living beings and living under the discipline of teachers etc. all the royal qualities are present in Yudhishthir. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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