Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.149.33: वह सत्यवादी और प्रमादरहित है। वह शास्त्रों की आज्ञाओं का पालन करता है और अपने भाइयों तथा सम्बन्धियों के प्रति सद्भाव रखता है। प्रजा युधिष्ठिर से बहुत प्रेम करती है। वह अपने मित्रों पर दया करने वाला, अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला और सज्जनों का रक्षक है॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स सत्यसंध: स तथाप्रमत्त:
शास्त्रे स्थितो बन्धुजनस्य साधु:।
प्रिय: प्रजानां सुहृदानुकम्पी
जितेन्द्रिय: साधुजनस्य भर्ता॥ ३३॥
अनुवाद
वह सत्यवादी और प्रमादरहित है। वह शास्त्रों की आज्ञाओं का पालन करता है और अपने भाइयों तथा सम्बन्धियों के प्रति सद्भाव रखता है। प्रजा युधिष्ठिर से बहुत प्रेम करती है। वह अपने मित्रों पर दया करने वाला, अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला और सज्जनों का रक्षक है॥ 33॥
‘He is truthful and free from negligence. He follows the instructions of the scriptures and has goodwill towards his brothers and relatives. The people love Yudhishthira a lot. He is kind to his friends, has controlled his senses and is a protector of gentlemen.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥