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mahabharat 5.149.31: मैं तो राज्य का अधिकारी नहीं था, फिर तुम राज्य कैसे लेना चाहते हो? जो राजा का पुत्र नहीं है, वह राज्य का स्वामी नहीं हो सकता। तुम दूसरे का धन हड़पना चाहते हो॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.149.31 
मय्यभागिनि राज्याय कथं त्वं राज्यमिच्छसि।
अराजपुत्रो ह्यस्वामी परस्वं हर्तुमिच्छसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मैं तो राज्य का अधिकारी नहीं था, फिर तुम राज्य कैसे लेना चाहते हो? जो राजा का पुत्र नहीं है, वह राज्य का स्वामी नहीं हो सकता। तुम दूसरे का धन हड़पना चाहते हो॥31॥
 
‘I was not entitled to the kingdom, then how do you want to take over the kingdom? One who is not the son of a king cannot be the owner of his kingdom. You want to usurp someone else's wealth.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)