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mahabharat 5.149.29: भरत! इसी प्रकार मैं भी अपंग था, इसलिए ज्येष्ठ होने पर भी बुद्धिमान पाण्डु तथा प्रजा ने बहुत विचार-विमर्श के बाद मुझे राज्य से वंचित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 149: दुर्योधनके प्रति धृतराष्ट्रके युक्तिसंगत वचन—पाण्डवोंको आधा राज्य देनेके लिये आदेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.149.29 
तथैवाहं मतिमता परिचिन्त्येह पाण्डुना।
ज्येष्ठ: प्रभ्रंशितो राज्याद्धीनाङ्ग इति भारत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भरत! इसी प्रकार मैं भी अपंग था, इसलिए ज्येष्ठ होने पर भी बुद्धिमान पाण्डु तथा प्रजा ने बहुत विचार-विमर्श के बाद मुझे राज्य से वंचित कर दिया।
 
Bharata! Similarly, I too was handicapped; therefore, despite being the eldest, I was deprived of the kingdom by the wise Pandu and the subjects after much deliberation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)