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श्लोक 5.149.16  |
देवापिरभवच्छ्रेष्ठो बाह्लीकस्तदनन्तरम्।
तृतीय: शान्तनुस्तात धृतिमान् मे पितामह:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| तात! देवापि उनमें श्रेष्ठ थे। उनके बाद जो राजकुमार हुए उनका नाम बाह्लीक था और प्रतीप के तीसरे पुत्र मेरे धैर्यवान दादा शान्तनु थे। 16॥ |
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| ‘Tat! Devapi was the best among them. The name of the prince after him was Bahlika and the third son of Pratip was my patient grandfather Shantanu. 16॥ |
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