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देवापिरभवच्छ्रेष्ठो बाह्लीकस्तदनन्तरम्।
तृतीय: शान्तनुस्तात धृतिमान् मे पितामह:॥ १६॥
अनुवाद
तात! देवापि उनमें श्रेष्ठ थे। उनके बाद जो राजकुमार हुए उनका नाम बाह्लीक था और प्रतीप के तीसरे पुत्र मेरे धैर्यवान दादा शान्तनु थे। 16॥
‘Tat! Devapi was the best among them. The name of the prince after him was Bahlika and the third son of Pratip was my patient grandfather Shantanu. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥