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श्लोक 5.149.10  |
तं पिता परमक्रुद्धो ययातिर्नहुषात्मज:।
शशाप पुत्रं गान्धारे राज्याच्चापि व्यरोपयत्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘गांधारीपुत्र! यदु के पिता नहुषनंदन ययाति ने अत्यन्त क्रोधित होकर यदु को शाप दे दिया तथा राज्य से भी निकाल दिया॥10॥ |
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| ‘Son of Gandhari! Yadu's father Nahushanandan Yayati became very angry and cursed Yadu and also removed him from the kingdom. 10॥ |
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