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श्लोक 5.149.1  |
वासुदेव उवाच
एवमुक्ते तु गान्धार्या धृतराष्ट्रो जनेश्वर:।
दुर्योधनमुवाचेदं राजमध्ये जनाधिप॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - हे राजन! गांधारी के ऐसा कहने पर राजा धृतराष्ट्र ने सब राजाओं के सामने दुर्योधन से इस प्रकार कहा -॥1॥ |
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| Lord Krishna says - O King! When Gandhari said this, King Dhritarashtra spoke to Duryodhan in front of all the kings like this -॥ 1॥ |
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