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mahabharat 5.148.9: ‘सत्यवादी विदुर राजकोष का प्रबन्ध, दान, सेवकों की देखभाल तथा सबका भरण-पोषण करने में लगे रहते थे।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.148.9 
कोशसंवनने दाने भृत्यानां चान्ववेक्षणे।
भरणे चैव सर्वस्य विदुर: सत्यसङ्गर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘सत्यवादी विदुर राजकोष का प्रबन्ध, दान, सेवकों की देखभाल तथा सबका भरण-पोषण करने में लगे रहते थे।॥9॥
 
‘Vidura, who was truthful, remained engaged in managing the treasury, giving donations, looking after the servants and providing for everyone.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)