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mahabharat 5.148.6: तत्पश्चात् नरसिंह विदुर सेवक की भाँति पंखा हिलाते हुए और नम्रतापूर्वक धृतराष्ट्र की सेवा करते हुए खड़े हो गए॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.148.6 
नीचै: स्थित्वा तु विदुर उपास्ते स्म विनीतवत्।
प्रेष्यवत् पुरुषव्याघ्रो वालव्यजनमुत्क्षिपन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् नरसिंह विदुर सेवक की भाँति पंखा हिलाते हुए और नम्रतापूर्वक धृतराष्ट्र की सेवा करते हुए खड़े हो गए॥6॥
 
‘Thereafter the man-lion Vidur stood down like a servant, waving the fan and humbly serving Dhritarashtra.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)