Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.148.36: धर्मपुत्र युधिष्ठिर कौरवों के इस न्यायपूर्वक प्राप्त राज्य का शासन करें और राजा धृतराष्ट्र तथा शान्तनुनन्दन भीष्म से कर्तव्य की शिक्षा लेते रहें। 36॥ | mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा कथन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मपुत्र युधिष्ठिर कौरवों के इस न्यायपूर्वक प्राप्त राज्य का शासन करें और राजा धृतराष्ट्र तथा शान्तनुनन्दन भीष्म से कर्तव्य की शिक्षा लेते रहें। 36॥
Let the righteous son Yudhishthir rule this justly acquired kingdom of the Kauravas and may he continue to learn duty from King Dhritarashtra and Shantanunandan Bhishma.' 36॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णवाक्ये अष्टचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥