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mahabharat 5.148.33: वास्तव में यह महाभयानक राज्य राजा पाण्डुक का है। केवल उनके पुत्र ही इसका उत्तराधिकारी हो सकते हैं, अन्य कोई नहीं। अतः यह सम्पूर्ण राज्य पाण्डवों का है; क्योंकि पितरों का राज्य पुत्रों और पौत्रों को ही प्राप्त होता है॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.148.33 
राज्यं तु पाण्डोरिदमप्रधृष्यं
तस्याद्य पुत्रा: प्रभवन्ति नान्ये।
राज्यं तदेतन्निखिलं पाण्डवानां
पैतामहं पुत्रपौत्रानुगामि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में यह महाभयानक राज्य राजा पाण्डुक का है। केवल उनके पुत्र ही इसका उत्तराधिकारी हो सकते हैं, अन्य कोई नहीं। अतः यह सम्पूर्ण राज्य पाण्डवों का है; क्योंकि पितरों का राज्य पुत्रों और पौत्रों को ही प्राप्त होता है॥ 33॥
 
‘In reality, this formidable kingdom belongs to King Panduka. Only his sons can inherit it, no one else. Hence, this entire kingdom belongs to the Pandavas; because the kingdom of the forefathers is passed on to the sons and grandsons only.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)