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mahabharat 5.148.29: इस राजसभा में पधारे हुए समस्त राजा, ऋषिगण तथा सभासदगण, आपके मंत्रीगण तथा सेवकगण, कृपया आप पापी दुर्योधन के अपराधों को सुनें। मैं उन्हें सुनाता हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.148.29 
ये पार्थिवा राजसभां प्रविष्टा
ब्रह्मर्षयो ये च सभासदोऽन्ये।
शृण्वन्तु वक्ष्यामि तवापराधं
पापस्य सामात्यपरिच्छदस्य॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस राजसभा में पधारे हुए समस्त राजा, ऋषिगण तथा सभासदगण, आपके मंत्रीगण तथा सेवकगण, कृपया आप पापी दुर्योधन के अपराधों को सुनें। मैं उन्हें सुनाता हूँ।'
 
All the kings, sages and other members of the assembly who have come to this royal court, along with your ministers and servants, please listen to the crimes of you, the sinner Duryodhana. I shall narrate them.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)