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mahabharat 5.148.28: तत्पश्चात् राजा सुबल की पुत्री गान्धारी ने अपने कुल के नाश के भय से क्रोधित होकर समस्त राजाओं के सामने अपने पापी और दुष्ट स्वभाव वाले पुत्र दुर्योधन से धर्म और अर्थ से परिपूर्ण ये वचन कहे - 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.148.28 
ततोऽथ राज्ञ: सुबलस्य पुत्री
धर्मार्थयुक्तं कुलनाशभीता।
दुर्योधनं पापमतिं नृशंसं
राज्ञां समक्षं सुतमाह कोपात्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा सुबल की पुत्री गान्धारी ने अपने कुल के नाश के भय से क्रोधित होकर समस्त राजाओं के सामने अपने पापी और दुष्ट स्वभाव वाले पुत्र दुर्योधन से धर्म और अर्थ से परिपूर्ण ये वचन कहे - 28॥
 
Thereafter, King Subala's daughter Gandhari, fearing the destruction of her clan, angrily spoke these words full of religion and meaning to Duryodhana, his sinful and evil-natured son, in front of all the kings - 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)