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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  5.148.25-26h 
बद्‍ध्वा वा निकृतिप्रज्ञं धार्तराष्ट्रं सुदुर्मतिम्॥ २५॥
शाधीदं राज्यमद्याशु पाण्डवैरभिरक्षितम्।
 
 
अनुवाद
अथवा, उस अत्यन्त दुष्ट बुद्धि वाले धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को, जिसका मन सदैव छल-कपट में लगा रहता है, शीघ्र ही पकड़ लो और पाण्डवों द्वारा सुरक्षित इस राज्य पर शासन करो।
 
Or, quickly capture that most evil-minded Duryodhana, son of Dhritarashtra, whose mind is always engaged in deceit and fraud, and rule this kingdom protected by the Pandavas. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)