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mahabharat 5.148.24-25h: यदि इन दिनों प्रलयकाल उपस्थित होने के कारण तुम्हारी बुद्धि नष्ट हो गई है, तो मेरे और धृतराष्ट्र के साथ वन में चलो।   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  5.148.24-25h 
अथ तेऽद्य मतिर्नष्टा विनाशे प्रत्युपस्थिते॥ २४॥
वनं गच्छ मया सार्धं धृतराष्ट्रेण चैव ह।
 
 
अनुवाद
यदि इन दिनों प्रलयकाल उपस्थित होने के कारण तुम्हारी बुद्धि नष्ट हो गई है, तो मेरे और धृतराष्ट्र के साथ वन में चलो।
 
If you have lost your wisdom due to the presence of the time of destruction these days, then come to the forest with me and Dhritarashtra. 24 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)