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mahabharat 5.148.23-24h: महाबाहो! जिस प्रकार प्रजापति प्रजाओं का निर्माण करते हैं और फिर उनका विनाश करते हैं, उसी प्रकार तुम्हें अपने कुल का विनाश देखकर भी उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  5.148.23-24h 
प्रजापति: प्रजा: सृष्ट्वा यथा संहरते तथा॥ २३॥
नोपेक्षस्व महाबाहो पश्यमान: कुलक्षयम्।
 
 
अनुवाद
महाबाहो! जिस प्रकार प्रजापति प्रजाओं का निर्माण करते हैं और फिर उनका विनाश करते हैं, उसी प्रकार तुम्हें अपने कुल का विनाश देखकर भी उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
 
Mahabaho! Just as Prajapati creates the people and then destroys them, similarly you should not ignore the destruction of your clan after seeing it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)