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mahabharat 5.148.17: भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - महाराज! जब परम तेजस्वी द्रोणाचार्य ने ऐसा कहा, तब सत्यनिष्ठ और धर्मज्ञ विदुर ने अपने बड़े पिता भीष्म की ओर मुड़कर उनके मुख की ओर देखकर यह कहा॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.148.17 
वासुदेव उवाच
एवमुक्ते महाराज द्रोणेनामिततेजसा।
व्याजहार ततो वाक्यं विदुर: सत्यसङ्गर:।
पितुर्वदनमन्वीक्ष्य परिवृत्य च धर्मवित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - महाराज! जब परम तेजस्वी द्रोणाचार्य ने ऐसा कहा, तब सत्यनिष्ठ और धर्मज्ञ विदुर ने अपने बड़े पिता भीष्म की ओर मुड़कर उनके मुख की ओर देखकर यह कहा॥17॥
 
Lord Krishna says - Maharaj! When the extremely illustrious Dronacharya said this, Vidur, who was truthful and knowledgeable about Dharma, turned towards his elder father Bhishma and looking at his face said this.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)