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mahabharat 5.148.12: उनके वंश में उत्पन्न होकर तुम इस कुल में फूट क्यों डालते हो? हे राजन! अपने भाइयों के साथ इच्छित सुखों का भोग करो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.148.12 
कथं तस्य कुले जात: कुलभेदं व्यवस्यसि।
सम्भूय भ्रातृभि: सार्धं भुङ्क्ष्व भोगान् जनाधिप॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उनके वंश में उत्पन्न होकर तुम इस कुल में फूट क्यों डालते हो? हे राजन! अपने भाइयों के साथ इच्छित सुखों का भोग करो॥12॥
 
Being born in their lineage, why do you create divisions in this family? O King! Enjoy the pleasures desired along with your brothers.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)