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mahabharat 5.148.11: पराक्रमी राजा धृतराष्ट्र ही सिंहासन पर बैठेंगे और महात्मा विदुर सदैव उनकी सेवा में उपस्थित रहेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 148: द्रोणाचार्य, विदुर तथा गान्धारीके युक्तियुक्त एवं महत्त्वपूर्ण वचनोंका भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा कथन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.148.11 
सिंहासनस्थो नृपतिर्धृतराष्ट्रो महाबल:।
अन्वास्यमान: सततं विदुरेण महात्मना॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पराक्रमी राजा धृतराष्ट्र ही सिंहासन पर बैठेंगे और महात्मा विदुर सदैव उनकी सेवा में उपस्थित रहेंगे।
 
‘The mighty King Dhritarashtra would only sit on the throne and the great soul Vidur would always be present to serve him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)