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mahabharat 5.147.33: तब उन्होंने माता सत्यवती से कहा - 'माता! मैंने इस कुल की वृद्धि के लिए और विशेष रूप से आपको यहाँ लाने के लिए राजा न बनने तथा ब्रह्मचारी रहने की बार-बार प्रतिज्ञा की है। अतः आप मुझे इस राज्य का भार वहन करने के लिए नियुक्त न करें।'॥33॥   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.33 
ऊर्ध्वरेता ह्यराजा च कुलस्यार्थे पुन: पुन:।
विशेषतस्त्वदर्थं च धुरि मा मां नियोजय॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब उन्होंने माता सत्यवती से कहा - 'माता! मैंने इस कुल की वृद्धि के लिए और विशेष रूप से आपको यहाँ लाने के लिए राजा न बनने तथा ब्रह्मचारी रहने की बार-बार प्रतिज्ञा की है। अतः आप मुझे इस राज्य का भार वहन करने के लिए नियुक्त न करें।'॥33॥
 
Then he said to mother Satyavati - 'Mother! I have repeatedly vowed to not be a king and to remain a celibate for the growth of this clan and especially to bring you here. Therefore, do not appoint me to bear the burden of this kingdom.'॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)