Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.147.30-31: महाराज! तत्पश्चात् मेरी शुभ्र माता सत्यवती, नगर के लोग, सेवक, पुरोहित, आचार्य और विद्वान ब्राह्मण अत्यन्त दुःखी होकर मुझसे बार-बार कहने लगे - 'आप ही राजा बनें, अन्यथा महाराज प्रतीप द्वारा रक्षित राष्ट्र आपके पास पहुँचकर नष्ट हो जाएगा। अतः हे महामुने! आप ही हमारे हित के लिए राजा बनें।'॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: पौरा महाराज माता काली च मे शुभा।
भृत्या: पुरोहिताचार्या ब्राह्मणाश्च बहुश्रुता:।
मामूचुर्भृशसंतप्ता भव राजेति संततम्॥ ३०॥
प्रतीपरक्षितं राष्ट्रं त्वां प्राप्य विनशिष्यति।
स त्वमस्मद्धितार्थं वै राजा भव महामते॥ ३१॥
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् मेरी शुभ्र माता सत्यवती, नगर के लोग, सेवक, पुरोहित, आचार्य और विद्वान ब्राह्मण अत्यन्त दुःखी होकर मुझसे बार-बार कहने लगे - 'आप ही राजा बनें, अन्यथा महाराज प्रतीप द्वारा रक्षित राष्ट्र आपके पास पहुँचकर नष्ट हो जाएगा। अतः हे महामुने! आप ही हमारे हित के लिए राजा बनें।'॥30-31॥
Maharaj! Thereafter my auspicious mother Satyavati, the people of the city, the servants, the priests, the teachers and the learned Brahmins became very upset and started saying to me repeatedly - 'You only should become the king, otherwise the nation protected by Maharaj Pratipa will reach you and get destroyed. Therefore, O great one! You should become the king for our benefit.'॥ 30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥