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mahabharat 5.147.3-4: तत्पश्चात् सूर्यास्त के पश्चात् पांचों भाइयों ने पाण्डव, विराट आदि सभी राजाओं से विदा ली और संध्यावंदन करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करके कुछ देर तक उनका ध्यान करते रहे। तत्पश्चात् उन्होंने दशरथ कुलभूषण श्रीकृष्ण को बुलाकर उनसे गुप्त मंत्रणा आरम्भ की।   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  5.147.3-4 
विसृज्य सर्वान् नृपतीन् विराटप्रमुखांस्तदा।
पाण्डवा भ्रातर: पञ्च भानावस्तं गते सति॥ ३॥
संध्यामुपास्य ध्यायन्तस्तमेव गतमानसा:।
आनाय्य कृष्णं दाशार्हं पुनर्मन्त्रममन्त्रयन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सूर्यास्त के पश्चात् पांचों भाइयों ने पाण्डव, विराट आदि सभी राजाओं से विदा ली और संध्यावंदन करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करके कुछ देर तक उनका ध्यान करते रहे। तत्पश्चात् उन्होंने दशरथ कुलभूषण श्रीकृष्ण को बुलाकर उनसे गुप्त मंत्रणा आरम्भ की।
 
Thereafter, after sunset, the five brothers bid farewell to all the kings like Pandavas, Virat etc. and after doing evening prayers, they concentrated on Lord Krishna and kept meditating on Him for some time. Then he called Dasharha Kulabhushan Shri Krishna and started secret consultation with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)