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mahabharat 5.147.24: तत्पश्चात् एक समय मैं परशुरामजी से द्वन्द्वयुद्ध करने के लिए युद्धभूमि में गया था। उन दिनों परशुरामजी के भय से यहाँ के नागरिकों ने राजा विचित्रवीर्य को इस नगर से निकाल दिया था॥24॥   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.24 
ततो रामेण समरे द्वन्द्वयुद्धमुपागमम्।
स हि रामभयादेभिर्नागरैर्विप्रवासित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक समय मैं परशुरामजी से द्वन्द्वयुद्ध करने के लिए युद्धभूमि में गया था। उन दिनों परशुरामजी के भय से यहाँ के नागरिकों ने राजा विचित्रवीर्य को इस नगर से निकाल दिया था॥24॥
 
After that, one time I entered the battlefield for a duel with Parashuramji. In those days, due to fear of Parashuramji, the citizens of this place had removed King Vichitravirya away from this city. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)