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mahabharat 5.147.22: मेरे पिता के मर जाने के बाद मैंने राजा विचित्रवीर्य को अपने राज्य का अधिपति बना दिया और मैं स्वयं उनका सेवक बनकर सिंहासन के नीचे खड़ा हो गया॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.22 
स्वर्यातेऽहं पितरि तं स्वराज्ये संन्यवेशयम्।
विचित्रवीर्यं राजानं भृत्यो भूत्वा ह्यधश्चर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मेरे पिता के मर जाने के बाद मैंने राजा विचित्रवीर्य को अपने राज्य का अधिपति बना दिया और मैं स्वयं उनका सेवक बनकर सिंहासन के नीचे खड़ा हो गया॥ 22॥
 
After my father passed away, I placed King Vichitravirya as the ruler of my kingdom and I myself became his servant and stood below the throne.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)