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mahabharat 5.147.21: राजा! सत्यवती के गर्भ से कुरुकुल का भार उठाने वाले पुण्यवान, महाबाहु श्री विचित्रवीर्य उत्पन्न हुए, जो मेरे छोटे भाई थे॥21॥   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.21 
तस्यां जज्ञे महाबाहु: श्रीमान् कुरुकुलोद्वह:।
विचित्रवीर्यो धर्मात्मा कनीयान् मम पार्थिव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा! सत्यवती के गर्भ से कुरुकुल का भार उठाने वाले पुण्यवान, महाबाहु श्री विचित्रवीर्य उत्पन्न हुए, जो मेरे छोटे भाई थे॥21॥
 
King! From Satyavati's womb was born the virtuous, mighty-armed Shri Vichitravirya, who bore the burden of Kurukula, who was my younger brother. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)