श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.147.2 
सम्भाष्य सुचिरं कालं मन्त्रयित्वा पुन: पुन:।
स्वमेव भवनं शौरिर्विश्रामार्थं जगाम ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
बहुत देर तक बातचीत और बार-बार गुप्त मंत्रणा के बाद भगवान श्रीकृष्ण विश्राम के लिए अपने धाम को चले गए॥2॥
 
After long talks and repeated secret consultations, Lord Krishna went to his abode for rest. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)