Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.147.19-20: यह कुल किसी भी प्रकार नष्ट न हो और इसकी कीर्ति सदैव बढ़ती रहे', ऐसी उनकी आन्तरिक इच्छा जानकर, कुल के हित के लिए तथा पिता की प्रसन्नता के लिए मैंने राजा न बनने तथा आजीवन ब्रह्मचारी रहने का कठिन व्रत लिया और माता काली (सत्यवती) को लाया। ये सब बातें आपको भली-भाँति ज्ञात हैं। मैं उस व्रत का पालन करते हुए यहाँ सदैव सुखपूर्वक रहता हूँ॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह कुल किसी भी प्रकार नष्ट न हो और इसकी कीर्ति सदैव बढ़ती रहे', ऐसी उनकी आन्तरिक इच्छा जानकर, कुल के हित के लिए तथा पिता की प्रसन्नता के लिए मैंने राजा न बनने तथा आजीवन ब्रह्मचारी रहने का कठिन व्रत लिया और माता काली (सत्यवती) को लाया। ये सब बातें आपको भली-भाँति ज्ञात हैं। मैं उस व्रत का पालन करते हुए यहाँ सदैव सुखपूर्वक रहता हूँ॥19-20॥
Knowing his inner desire that 'this clan should not be destroyed in any way and its fame should always keep on increasing', for the good of the clan and for the happiness of my father, I took a difficult vow of not becoming a king and remaining a celibate throughout my life and brought Mother Kali (Satyavati). All these things are well known to you. I always live here happily by adhering to that vow.॥19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥