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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना
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श्लोक 17
श्लोक
5.147.17
मम तात पिता राजन् शान्तनुर्लोकविश्रुत:।
तस्याहमेक एवासं पुत्र: पुत्रवतां वर:॥ १७॥
अनुवाद
तात! मेरे पिता शान्तनु विश्वविख्यात राजा थे, जो अपने पुत्रों में श्रेष्ठ माने जाते थे। राजन! मैं उनका ही पुत्र था।' 17॥
‘Tat! My father Shantanu was a world famous king, who was considered the best among his sons. Rajan! I was his only son. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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