Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.147.13: गोविन्द! मैं उन सबकी बातें सुनना चाहता हूँ। पिताजी! कृपया कुछ ऐसा कीजिए जिससे हमारा समय व्यर्थ न जाए। श्रीकृष्ण! आप ही हमारे आश्रय हैं, आप ही हमारे रक्षक हैं और आप ही हमारे गुरु हैं॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषां वाक्यानि गोविन्द श्रोतुमिच्छाम्यहं विभो।
यथा च नाभिपद्येत कालस्तात तथा कुरु।
भवान् हि नो गति: कृष्ण भवान् नाथो भवान् गुरु:॥ १३॥
अनुवाद
गोविन्द! मैं उन सबकी बातें सुनना चाहता हूँ। पिताजी! कृपया कुछ ऐसा कीजिए जिससे हमारा समय व्यर्थ न जाए। श्रीकृष्ण! आप ही हमारे आश्रय हैं, आप ही हमारे रक्षक हैं और आप ही हमारे गुरु हैं॥13॥
Govind! I want to hear what all of them have to say. Father! Please do something so that our time is not wasted. Shri Krishna! You are our shelter, you are our protector and you are our Guru. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥