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mahabharat 5.147.11-12: हे कृष्ण! आपने कौरव-सभा में कौरवों में श्रेष्ठ भीष्म और धृतराष्ट्र के समक्ष सब कुछ अवश्य कहा था। किन्तु आपकी और उनकी सभी बातों को मेरे लिए हितकर समझकर, काम और लोभ से अभिभूत मूर्ख तथा विद्वान दुर्योधन ने उन्हें अपने हृदय में स्थान नहीं दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.11-12 
उक्तवान् हि भवान् सर्वं वचनं कुरुमुख्ययो:।
धार्तराष्ट्रस्य तेषां हि वचनं कुरुसंसदि॥ ११॥
कामलोभाभिभूतस्य मन्दस्य प्राज्ञमानिन:।
अप्रियं हृदये मह्यं तन्न तिष्ठति केशव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण! आपने कौरव-सभा में कौरवों में श्रेष्ठ भीष्म और धृतराष्ट्र के समक्ष सब कुछ अवश्य कहा था। किन्तु आपकी और उनकी सभी बातों को मेरे लिए हितकर समझकर, काम और लोभ से अभिभूत मूर्ख तथा विद्वान दुर्योधन ने उन्हें अपने हृदय में स्थान नहीं दिया।
 
Krishna! You had certainly told everything in the Kaurava Sabha in front of the best of the Kurus Bhishma and Dhritarashtra. But considering all your and their words as being beneficial for me, the foolish and learned Duryodhan, overwhelmed by lust and greed, did not give them a place in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)