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mahabharat 5.147.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! शत्रुओं का दमन करने वाले भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर से उपपल्य में आये और उन्होंने पाण्डवों को यथावत् सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.147: युधिष्ठिरके पूछनेपर श्रीकृष्णका कौरवसभामें व्यक्त किये हुए भीष्मजीके वचन सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.147.1 
वैशम्पायन उवाच
आगम्य हास्तिनपुरादुपप्लव्यमरिंदम:।
पाण्डवानां यथावृत्तं केशव: सर्वमुक्तवान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! शत्रुओं का दमन करने वाले भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर से उपपल्य में आये और उन्होंने पाण्डवों को यथावत् सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया॥1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Lord Shri Krishna, the suppressor of enemies, came from Hastinapur to Uppalya and narrated the entire story to the Pandavas as it was. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)