Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.146.27: तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हें किसी प्रकार का कष्ट न हो।’ जब कुन्ती ने कर्ण से ऐसा कहा, तब कर्ण ने भी ‘तथास्तु’ कहकर उसकी बात मान ली। फिर वे दोनों अपने-अपने स्थान को चले गए॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 5.146: कर्णका कुन्तीको उत्तर तथा अर्जुनको छोड़कर शेष चारों पाण्डवोंको न मारनेकी प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हें किसी प्रकार का कष्ट न हो।’ जब कुन्ती ने कर्ण से ऐसा कहा, तब कर्ण ने भी ‘तथास्तु’ कहकर उसकी बात मान ली। फिर वे दोनों अपने-अपने स्थान को चले गए॥ 27॥
May you be blessed. May you not have to face any kind of trouble.' When Kunti said this to Karna, Karna too agreed to her saying 'Tathastu'. Then both of them went to their respective places.॥ 27॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कुन्तीकर्णसमागमे षट्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें कुन्ती और कर्णका भेंटविषयक एक सौ छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥