Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.146.15: जो लोग अपनी जीविका के लिए दुर्योधन पर निर्भर हैं, उनके लिए उसकी कृपा का ऋण चुकाने का यही उचित समय है। इस समय मुझे अपने प्राण न बचाकर उनका ऋण चुकाना है॥15॥ | mahabharat अध्याय 5.146: कर्णका कुन्तीको उत्तर तथा अर्जुनको छोड़कर शेष चारों पाण्डवोंको न मारनेकी प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयं हि काल: सम्प्राप्तो धार्तराष्ट्रोपजीविनाम्।
निर्वेष्टव्यं मया तत्र प्राणानपरिरक्षता॥ १५॥
अनुवाद
जो लोग अपनी जीविका के लिए दुर्योधन पर निर्भर हैं, उनके लिए उसकी कृपा का ऋण चुकाने का यही उचित समय है। इस समय मुझे अपने प्राण न बचाकर उनका ऋण चुकाना है॥15॥
This is the right time for those who are dependent on Duryodhan for their livelihood to repay his kindness. At this time, I have to repay their debt by not saving my own life.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥