Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.145.7: बेटा! धर्म शास्त्रों में मनुष्यों के लिए धर्म का सर्वोत्तम फल यही बताया गया है कि उनके पिता, गुरुजन तथा माता, जो अपने इकलौते पुत्र पर दृष्टि रखती हैं, उनसे संतुष्ट रहें। 7॥ | mahabharat अध्याय 5.145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतद् धर्मफलं पुत्र नराणां धर्मनिश्चये।
यत् तुष्यन्त्यस्य पितरो माता चाप्येकदर्शिनी॥ ७॥
अनुवाद
बेटा! धर्म शास्त्रों में मनुष्यों के लिए धर्म का सर्वोत्तम फल यही बताया गया है कि उनके पिता, गुरुजन तथा माता, जो अपने इकलौते पुत्र पर दृष्टि रखती हैं, उनसे संतुष्ट रहें। 7॥
Son! In religious scriptures, the best result of religion for human beings is that their father, their teachers and their mother, who keeps an eye on their only son, should be satisfied with them. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥