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mahabharat 5.145.6: बेटा! अपने भाइयों की ओर ध्यान न देकर तुम आसक्ति के कारण धृतराष्ट्र के पुत्रों की जो सेवा कर रहे हो, वह तुम्हारे योग्य नहीं है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.145.6 
स त्वं भ्रातॄनसम्बुद्धॺ मोहाद् यदुपसेवसे।
धार्तराष्ट्रान् न तद् युक्तं त्वयि पुत्र विशेषत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बेटा! अपने भाइयों की ओर ध्यान न देकर तुम आसक्ति के कारण धृतराष्ट्र के पुत्रों की जो सेवा कर रहे हो, वह तुम्हारे योग्य नहीं है॥6॥
 
Son! The service you are doing for the sons of Dhritarashtra out of attachment, while being unaware of your brothers, is not at all worthy for you. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)